बढा कदम ,आगे निकल

#poetry, #success , 

वक्त की पुकार है, आंसुओं मे धार है

चल रहा है कण कण , बदल रहा है पल पल।

कदम बढ़ा ले आज तू , सर उठा ले आज तू।

क्यूं कंपे हुए है हाथ , वक्त है अब तेरे साथ

नही तुझे किसी का डर , बढा कदम आगे निकल।।
जो हो गया सो खो गया, क्यूं उसको तू निहारता

सामने है विश्व सारा , भविष्य को संवारता।

ये हार भी तो हार है, कांटो का ही सही

व्यंग्य भी तो प्यार है, चुभता है दिल मे कहीं।।

कठिनाईयों को लांघकर , लिख दे अपना नया कल

बढ़ा कदम आगे निकल••

बेवजह न सोच तू , न हो इतना निराश

उत्साह को न कम कर , न मिटा तू अपनी प्यास।

हर कदम पर सफलता नही, न हर जगह है समतल

बस अपनी नजरों मे बना , एक सुनहरा कल।।

इन आदतों से सीख ले, सही राह पर चल

बढ़ा कदम आगे निकल•••••

                                       Aditya Adi Mishra

4 thoughts on “बढा कदम ,आगे निकल

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