Kumbhmela2019/आस्था की डुबकी

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PC: @joshikshama16

@adityamishravoice

Kumbh Mela is one of the best and most beautiful examples of Indian civilization and culture.Kumbh Mela is very popular on the world level. Millions of devotees from the world come and participate in the biggest festival of Hindu civilization.if you talk about Prayagraj Kumbh Mela, then this is the most popular and visited kumbh mela.
Kumbh Mela is often organized in four places. In the Haridwar, on the banks of River Ganges, Godavari in Nasik, the Shipra river in Ujjain and the most popular Prayagraj is situated on the banks of Sangam.

A main reason behind the popularity of the Prayagraj Kumbh Mela is the confluence of three major rivers. These are the rivers Ganga, Yamuna and Saraswati. People consider themselves blessed by bathing in confluence.
Organizing Kumbh Mela is associated with Sagar Manthan in the ancient texts. The present form of this fair has been taken by King Harshavardhana. At the same time Jagadguru Shankaracharya told the rules related to Kumbh mela.
According to Hindu belief, the Kumbh Mela is organized according to the rotation of Sun, Moon and Saturn. The reason behind this is that the nectar kalash was protected by these four deities.

It is believed that at the time of Mahakumbh, Kumbh Mela is organized together in the earth and heaven. In such a situation, this moment becomes more important for the devotees. Kumbh Mela is organized from Makar Sankranti till Mahashivaratri. In this long interval the devotees bath in millions.

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आस्था का महापर्व: कुंभ मेला 2019

कुंभ मेला भारतीय सभ्यता और संस्कृति का सबसे बेहतर और भव्य उदाहरण है. कुंभ मेला विश्व स्तर पर काफी लोकप्रिय और दर्शनीय है. यहां देश दुनिया से लाखों करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और हिंदू सभ्यता के सबसे बड़े पर्व में हिस्सा लेते हैं.

अगर बात करें प्रयागराज कुंभ मेला की तो, यहां का कुंभ सबसे लोकप्रिय और दर्शनीय होता है. कुंभ मेले का आयोजन प्रायः चार जगहों पर किया जाता है. जिनमें हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर, नासिक में गोदावरी, उज्जैन में शिप्रा नदी और सबसे लोकप्रिय प्रयागराज में संगम के तट पर लगता है. प्रयागराज कुंभ मेले के काफी लोकप्रिय होने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण तीन बड़ी नदियों का संगम है. ये बड़ी नदियां हैं, गंगा, यमुना और सरस्वती. लोग संगम में स्नान करके खुद को धन्य समझते हैं.

कुंभ मेले का आयोजन प्राचीन ग्रंथों में वर्णित सागर मंथन से जुड़ा हुआ है. इस मेले का वर्तमान स्वरूप सम्राट हर्षवर्धन के द्वारा लिया गया है. वहीं जगद्गुरु शंकराचार्य ने कुंभ से जुड़े हुए नियम को बताया.

हिंदू मान्यता के अनुसार कुंभ मेले का आयोजन सूर्य चंद्रमा गुरु और शनि की स्थिति के हिसाब से तय होता है. इसके पीछे का कारण यह है कि अमृत कलश की रक्षा इन्हीं 4 देवताओं के द्वारा की गई थी.

ऐसा माना जाता है कि महाकुंभ के वक्त पृथ्वी और स्वर्ग में एक साथ कुंभ मेले का आयोजन होता है. ऐसे में यह पल श्रद्धालुओं के लिए और महत्वपूर्ण हो जाता है. कुंभ मेले का आयोजन मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक किया जाता है. इस लंबे अंतराल में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करते हैं और अपने इष्ट देव को याद करते हैं.
नासिक और उज्जैन में होने वाले कुंभ मेले को सिंहस्थ कुंभ का नाम दिया जाता है, क्योंकि उस समय गुरु कुंभ राशि में होते हैं.

जिस प्रकार पूरे विश्व में लोग नए साल के वक्त अपनी सभी गलत आदतों को छोड़ने का निर्णय लेते हैं. जिसे न्यू ईयर रेजोल्यूशन कहा जाता है. उसी प्रकार कुंभ मेले में श्रद्धालु स्नान करके अपनी सभी गलत आदतों को वहीं छोड़ने का संकल्प लेते हैं, इसीलिए कुंभ मेले को हिंदू मान्यता का न्यू ईयर रेजोल्यूशन डे भी कह सकते हैं.

कुंभ मेले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें-:
• कुंभ मेला 12 साल के अंतराल पर आयोजित किया जाता है. इसका आयोजन चार मुख्य स्थानों पर होता है. जिनमें प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक शामिल हैं. इन 4 जगहों पर आयोजित कुंभ मेले के बीच का अंतराल तीन-तीन वर्ष का होता है.

• महाकुंभ का आयोजन 12 पूर्ण कुंभ मेलों के बाद होता है. इसीलिए महाकुंभ 144 वर्षों के अंतराल पर आयोजित किया जाता है. महाकुंभ में स्नान करना बड़े सौभाग्य की बात होती है, क्योंकि बहुत कम लोग ही इस अवसर के भागीदार बन पाते हैं.

• कुंभ मेले के समय प्रयागराज में एक नया शहर बताया जाता है. जहां श्रद्धालुओं के लिए हर एक सुविधा का ख्याल रखा जाता है. श्रद्धालुओं के 1 महीने के कल्पवास के लिए विशेष आयोजन किया जाता है.

• इस वर्ष कुंभ मेले में 14 अखाड़े शामिल हो रहे हैं. इस बार एक नया अखाड़ा भी जुड़ा है, यह अखाड़ा ‘किन्नर अखाड़ा’ है. अखाड़े से तात्पर्य साधु संतों के समूह से है. जो अपनी विचारधारा और संस्कृति को संजोकर रखते हुए कुंभ मेले के विशाल पर्व में सम्मिलित होते हैं.

• हर तीसरे साल में ग्रहों की चाल के हिसाब से प्रयाग, हरिद्वार उज्जैन और नासिक में कहीं ना कहीं कुंभ मेला आयोजित किया जाता है. इस प्रकार श्रद्धालुओं को प्रत्येक 3 वर्ष में कुंभ स्नान का सौभाग्य प्राप्त होता है.

ठंड और आस्था: भारत के उत्तरी भाग में दिसंबर, जनवरी और फरवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है. ऐसे में लोग घर से निकलना भी उचित नहीं समझते. लेकिन श्रद्धा के इस बड़े पर्व में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु ना सिर्फ कुंभ मेले में इकट्ठे होते हैं, बल्कि स्नान और कल्पवास भी करते हैं. कल्पवास में शामिल श्रद्धालु 1 महीने के लिए देश दुनिया से अलग होकर सिर्फ अपने ईश्वर की शरण में चले जाते हैं और उन्हीं का ध्यान करते हैं. उन्हें ठंड, देश-दुनिया आदि का ख्याल नहीं रहता. मान्यता के अनुसार इस वक्त में वह ईश्वर की शरण में होते हैं.

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Story reported by: Alok sharma & @___theartofhope__

Ideas &execution:@pandey.shi

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Photography:@joshikshama16 @as8516834405

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