दिल्ली का मिज़ाज/Mood of delhi

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Adityamishravoice

दिल्ली सपनों का शहर तो नहीं है, पर हां सपने बड़े यहां भी देखे जाते हैं। चकाचौंध से ज्यादा राजनीतिक उठापटक से दिल्ली सुबह शाम गुजरती रहती है। अभी यहां का मौसम थोड़ा बिगड़ सा रहा है, मौसम और मूड दोनों पर हवा का असर हो रहा है।

सरकारें तो बनती बदलती रहती हैं, वही नेता कभी सड़क से आते हैं तो कभी सड़क पर उतर आते हैं। अभी दिल्ली के चुनाव भी आ रहे हैं, ऐसे में हर एक बयान वोट से प्रभावित नजर आता है। दिल्ली पर पूरे देश की हवा का असर पड़ता है और साथ ही दिल्ली की अपनी भी एक हवा है, जो प्रदूषित है। शिक्षा के कई बड़े संस्थान आज देश की राजनीति और माहौल पर बढ़-चढ़कर अपनी बात रख रहे हैं। हालांकि उनका विरोध का तरीका सवालों के घेरे में है। पुलिस प्रशासन भी अपनी प्रतिक्रियाओं पर सटीक नजर नहीं आता।

शायद दिल्ली में धुआं कुछ ज्यादा ही भर गया है, इसीलिए तो आजकल अपने भी नजर नहीं आते। सब पर सत्ता और राजनीतिक पार्टियों का रंग चढ़ा है। दूसरा एक और पहलू है मीडिया. ऐसे वक्त में मीडिया का रोल भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मीडिया भी आजकल बंट सा गया है। कोई भी मामले की तह तक जाना नहीं चाहता। बस सुनी सुनाई बात पर खबर का प्रसारण हो रहा है।

कड़कड़ाती ठंड में जहां दिल्ली का एक बड़ा हिस्सा सिकुड़ सा गया है। वहीं आगजनी और हिंसक झड़पें उन्हें और सिकुड़ने पर मजबूर कर रही हैं। कंपकपाती दिल्ली की धड़कन और धीमी हो गई है। वैसे भी दिल्ली में लगने वाली आग को देश तक फैलने में वक्त नहीं लगता। ऐसे में इस आग को हवा देना है या पानी चुनाव आपका है! वैसे भी दिल्ली में चुनाव का दौर चल ही रहा है-वोट करिए या चोट करिए!

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Delhi is not a city of dreams, but yes big dreams are also seen here. Delhi passes through with more political upheaval than glare from morning to evening. Right now the weather here is getting a bit bad, wind is impacting both the weather and the mood.

Governments keep changing, Sometimes the same leaders come from the road and sometimes they come on the road. elections in Delhi also coming up, every single statement seems to be affected by the vote. Delhi has the effect of the whole country and at the same time Delhi has its own political mood. Many big institutes of education are speaking out on the politics and environment of the country today. However, his method of protest is under question. The police administration also does not seem accurate on its responses.

In such a time, the role of media also becomes very important. Media is also divided nowadays. Nobody wants to get to the bottom of the matter. Just heard, news is being broadcast.

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9 thoughts on “दिल्ली का मिज़ाज/Mood of delhi

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