एक ख़त मोबाइल के नाम/A Letter to Mobile

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Mobile love

वर्षों का साथ है अपना, ऐसा कभी नहीं हुआ कि तुम मुझसे अलग रही हो। सोते वक्त तकिए के पीछे और जागते ही आंखों के नीचे सदा तुम नज़र आती हो। लेकिन कभी-कभी आंखों पर तुम्हें ज्यादा देखने का असर महसूस होता है, हालांकि उससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। वैसे एक बात है तुम्हारे आने से जिंदगी में स्थिरता आई हो या नहीं, पर व्यस्तता जरूर आ गई है।

कभी-कभी लगता है, तुम ना होती तो कैसा होता- मेट्रो का 45 मिनट का सफ़र, गर्मी की दोपहर, बाथरूम का जाना, नींद का आना सब कैसे होता! वैसे एक बात पूछनी थी, क्या तुम कभी बोर नहीं होती, वही फेसबुक, व्हाट्सएप, नेटफ्लिक्स और यूट्यूब के बीच में, खैर मैं तो नहीं होता।

पर अफसोस एक समय के बाद तुम पर उम्र का तकाजा नजर आने लगता है। स्क्रीन पर कई स्क्रैच तुम्हारे चांद से चेहरे पर दाग जैसे नजर आते हैं। बैटरी की लाइफ कम हो गई है, इसीलिए साथ में first aid kit जिसमें चार्जर, पावर बैंक लेकर चलता हूं। तुम्हारा ख्याल जो रखना है, मैं बिल्कुल रिस्क नहीं ले सकता। तुममें पहले जैसी रफ्तार भी नहीं रही, लेकिन फिर भी तुम जो भी हो, जैसी भी हो अच्छी लगती हो। लेकिन एक बात है, तुम्हें मेरा अच्छे से ख्याल रखना आता है।

अगर battery फुल हो और इंटरनेट का घोड़ा भी तेजी से दौड़ रहा हो। ऐसे में क्या खाना, क्या पीना, क्या बाहर, क्या अंदर सब मोह माया सा लगता है। बस सिर्फ एक चीज परेशान करती है, जब तुम्हारी बैटरी डाउन होने लगती है तो ऐसा लगता है जैसे ऑक्सीजन छीन लिया जा रहा हो। सच में आईसीयू वाली फीलिंग आती है।

तुम्हारे होने से बेरोजगार को रोजगार की तलाश नही सताती, स्टूडेंट्स को trigonometry नहीं नजर आती। भूखे को खाना और सुबह उठे को पखाना, कुछ याद नहीं रहता। तुम्हारा नशा सा चढ़ा रहता है, इसीलिए तो आजकल सब बस तुम में ही समाए जा रहे हैं। जब हाथ में तुम हो और कान में ईयरफोन. फिर क्या सड़क, क्या नाला सब एक सा नजर आता है।



अब तो खेलना कूदना भी लोग छोड़ते जा रहे हैं, क्योंकि सब तो तुम्हारे पास उपलब्ध है। जिंदगी पर तुम्हारा ऐसा जबरदस्त असर हुआ है कि सारी दुनिया अब ग्लोब में नहीं, मोबाइल फोन में नजर आती है।

The whole world is now seen in mobile phones, not in the globe. –adityamishravoice