शाहीन बाग वाला प्यार/ Shaheen Bagh & Love

#shaheenbagh #CAA_NRC #protest #Delhi #adityamishravoice

मैं CAA का समर्थक था, वो विरोधी। मगर हमारे दिल के तार जुड़ ही गए। जब पहली बार उसे देखा था, वह किसी बात पर शर्माती हुई अपनी सहेलियों को मना कर रही थी. लेकिन अगले ही पल माइक उसके हाथ में था और आजादी दिल में। मैं तो वहां से काफी दूर खड़ा, अपने मोबाइल में उसका वीडियो देख रहा था। मन तो कर रहा था कि कमेंट में कुछ सुना दूं, दे दूं आजादी का जवाब। लेकिन अगले ही पल उसकी मासूमियत का ख्याल आ गया। कमेंट बॉक्स में “अच्छा बोलती हो पर सच्चा भी बोलना सीखो” लिख कर आगे बढ़ गया।

शाहीन बाग वैसे तो दिल्ली का ही भाग है, पर वहां सरकार की नई नीति पर विरोध के स्वर बुलंद हैं। जिसमें कई बातें अच्छी और बुरी दोनों हैं। खैर शाम को नोटिफिकेशन आया someone liked your comment. सच में सारा ध्यान हटकर उसके नाम और प्रोफाइल पर आ गया। रिक्वेस्ट भेजी, एक्सेप्ट हो गई। बातचीत के तार भी जुड़ने लगे। पहले तो CAA का दामन थाम हम आगे बढ़े। फिर जैसे ही वह NRC पर आने लगी, मैंने पूछा NCR की रहने वाली हो? बोली “अलीगढ़, पर काफी वक्त से दिल्ली में हूं।” मैंने भी अपना पूरा पता बिना पूछे बता दिया।

वह शाहीन बाग से होकर भी मुझे कनॉट प्लेस वाली संघी लगती थी। अक्सर मैं उससे कहता था, “आओ कभी, तुम्हें पालिका बाजार टहला दूं।” उसका भी नहले पर दहला आता था, “पर तुम्हें शाहीन बाग आकर रिसीव करना पड़ेगा।” मैं ना शाहीन बाग गया, ना वह पालिका आई। पर एक बार मंडी हाउस में उसे देख कर रुक गया। वह मुझे देखकर चौंक गयी, “तुम भी यहाँ आते हो?”
मैंने कहा “क्यों, अरे साहित्य अकादमी यहां है, दूरदर्शन यहां है. नहीं आ सकता?”
वह बोली “न बाबा, तुम्हारी सरकार है। आओ जहां मर्जी! मैंने कहा “शाहीन बाग भी!” वह बोली “बिल्कुल आओ, बस CAA-NRC वापस लेने का कागज लेकर आना। वरना घुसने ना मिलेगा। मैंने कहा “अरे! NRC तो आ ही नहीं रहा है। बोली “चल झूठे”.

एक बार हिम्मत करके सोचा आज मिल कर आता हूं। मेट्रो पकड़ी शाहीन बाग उतरा। उतरते ही वहां की हवा में बगावत की बू महसूस होने लगी। शायद मेरी विचारधारा हावी हो रही थी। फिर भी नीचे उतरकर उस को फोन लगाया। बोला “शाहीन बाग आ गया हूं. कहां हो? बोली “वहीं, जहां कोई सरकार का आता जाता नहीं। अभी भी वह अपने अंदाज में थी। मैं माहौल के हिसाब से बढ़ रहा था। पर उसकी बात ने मेरे कदम रोक दिये।

आज भी मेरी पहुंच सब जगह है, बस उसके दिल तक नहीं। क्योंकि वह शाहीन बाग हो चुकी है और मैं कनॉट प्लेस।

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I was a supporter of CAA, she was an opponent. But We still fall in love. When I saw her first time, she was with her friends, denying for something. But the next moment Mike was in her hand and freedom in her heart. She was addressing the public. I was standing far away, watching her video on the phone. I was thinking to comment on her statement but I couldn’t because I was in love with her smile and innocence. i commented ” you are a good speaker, but try to speak truth also. Shaheen Bagh is a part of Delhi, but there are loud voices of protest against the new government policy. In which many things are good and bad both. Well, the notification popped up in the evening “someone liked your comment”. In fact, all attention was diverted to his name and profile.

Request sent, received. We started connecting. First, we talked about CAA. As she started NRC, I asked “Are you from NCR? She replied “Aligarh, but I have been in Delhi for a long time.” I also told my full address without asking. Even though she was from Shaheen Bagh but for me, she was always like someone from Connaught Place. Often I used to say to her, “Come on, let’s visit Palika Bazaar.” She was also good at replying, Used to say “But you have to come to Shahin Bagh and receive me. I never went nor did she come.

But once i saw her at Mandi House, I stopped. She was shocked to see me and said: “You also come here?” I said, “Hey Sahitya Academy is here, Doordarshan is here. Why I Can’t come?” She said “No Baba, it’s your government. Go wherever you wish. I said, “Shahin Bagh too!” She said “Absolutely come, just bring the CAA-NRC withdrawal paper. Without that not allowed.” I said “Hey! NRC is not coming.” She replied, “don’t lie again.”

Once I dared to meet her. I took the metro, got off at Shaheen bagh. I called her and asked, “where are you?” She said, “the same place where no one from the government is coming!.” She was still in her style. I was changing as per the condition. But her words stopped me. I came back. Even today my reach is everywhere. but not to her. Because she is Shaheen Bagh and I Connaught Place.

Adityamishravoice

Adityamishravoice

13 thoughts on “शाहीन बाग वाला प्यार/ Shaheen Bagh & Love

  1. अद्भुत मिश्रा जी
    आगे की पींगों का इंतजार रहेगा
    अंकुर फुट ही चुका है, अब वृक्ष बनने की देर है बस 😀

    Liked by 1 person

  2. Nice story… Love d way you wrote d story sir… Nver loose hope..

    Jyda kuch to nhi bs kuch shbdo m ek baat kehna chahungi…

    Milna or milana to upr wale ka kam h.. Bas usse paane or khone m insaan ke apne hi pryaas h…

    God luck too youu aditya ji..

    Liked by 2 people

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