Inside Out: Peace

Adityamishravoice

#Motivation #Peace #Blogger #chill #lockdown

When an example is used to explain the word peace, mental peace will come first in the list. It simply means that there is no worry in our thinking and understanding. When something keeps haunting our mind again and again, the good and bad consequences associated with it make us think more, only then anxiety comes in action. We worry about both good and bad work. Where we are troubled by thinking the consequences of bad work. At the same time, waiting for the success of good work does not let you sit in peace. But in fact our karma only changes in the result, if we understand this, then to a large extent we can separate ourselves from this problem.

But the reality is that Sadvakya is only good at listening. When it comes to following them, 99% of things are limited to books only. That is why they need to gradually follow up on the right.

Worrying is not bad, but it is bad enough to be subjected to anxiety. The doctor takes care of the patients. Heals them, but does not take their own merge. We just need to understand the same thing, we need to treat problems, not adopt them.

Any thing has two meanings, either it brings some good message to us, or it teaches us a lesson.The more time it takes to understand this meaning, is the total time we remain worried. There is no doubt that you are the master of your choice. Nobody can understand you better than yourselves. Only you can understand the circumstances you are going through, what you have done well and what you are sorry for.

The other is just like the viewer who goes to the cinema hall and watches the film, and the acting shown on the screen determines the success/failure of the film. But many times, the hard work and forward thinking behind it is not understood by the viewer. You are also like a character for others, some you will like and some people dislike. In such a situation, focusing on your performance is the best solution. Do your work with honesty, do your self-assessment as much as possible. Question yourself, but do not doubt. At least once a day, forget everything and close your eyes and sit somewhere. You will understand everything on your own.

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जब शांति शब्द को समझाने के लिए किसी उदाहरण का इस्तेमाल किया जाएगा, तब उसमें मानसिक शांति सबसे पहले आएगी। इससे सीधा सा मतलब है, हमारी सोच और समझ में चिंता का ना होना. जब कोई बात हमारे मन को बार-बार परेशान करते रहती है उससे जुड़े अच्छे और बुरे परिणाम हमें ज्यादा सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं, तभी चिंता का जन्म होता है। अच्छे और बुरे काम दोनों के लिए हम चिंता करते हैं। जहां बुरे काम के परिणाम को सोचकर हम परेशान रहते हैं। वहीं अच्छे काम की सफलता हमें शांति से बैठने नहीं देती।
पर वास्तव में हमारा कर्म ही परिणाम में बदलता है, यह बात अगर हम समझ गए तो काफी हद तक इस परेशानी से खुद को अलग कर सकते हैं।

पर वास्तविकता यह है कि सद्वाक्य सिर्फ सुनने में ही अच्छे लगते हैं। जब बात उनके पालन की आती है तो 99% बातें सिर्फ किताबों तक सीमित रह जाती हैं। इसीलिए उनका धीरे-धीरे ही सही पर अनुपालन करने की ज़रूरत है।

चिंतित होना बुरा नहीं है, लेकिन चिंता के वश में हो जाना काफी बुरा है। डॉक्टर मरीजों की देखभाल करता है. उन्हें स्वस्थ करता है, लेकिन उनका मर्ज खुद नहीं ले लेता। बस हमें भी यही बात समझने की जरूरत है, परेशानियों का इलाज करने की जरूरत है उन्हें अपनाने की नहीं।

किसी भी बात के दो मतलब होते हैं, या तो वह हमारे लिए कुछ अच्छा संदेश लाती है, या फिर बिल्कुल बेकार होती है। इसी अर्थ को समझने में जितना वक्त लगता है, उतने ही समय हम चिंतित रहते हैं। आप अपनी मर्जी के मालिक हैं, इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। अपने को खुद से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। आप किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, क्या आपने अच्छा किया है और किस चीज का आपको मलाल है, यह सिर्फ आप ही समझ सकते हैं।

दूसरा सिर्फ उसी दर्शक के समान है, जो सिनेमा हॉल में जाकर फिल्म देखता है और पर्दे पर दिखाए गए अभिनय से फिल्म की सफलता असफलता निर्धारित करता है। लेकिन कई बार उसके पीछे की मेहनत और आगे की सोच उस दर्शक की समझ में नहीं आती। आप भी दूसरों के लिए एक किरदार जैसे हैं, कुछ को आप पसंद आएंगे और कुछ लोगों को नापसंद. ऐसे में अपने अभिनय पर ध्यान देना, सबसे बेहतर उपाय है।

अपने काम को पूरी ईमानदारी से करें, जितना ज्यादा हो सके अपना आत्ममूल्यांकन करें। खुद से सवाल करें, लेकिन संदेश मत करें। दिन में कम से कम एक बार सब कुछ भूल कर आंखें बंद करके, कहीं बैठ जाएं। आपको सब कुछ अपने आप ही दिखाई दे जाएगा।

Adityamishravoice Twitter

24 thoughts on “Inside Out: Peace

  1. I could only remember the last para, sit silently and analyse yourself, you will understand yourself. This is a really important thing to do. This clears out many confusions you have, I myself have been practising this and results are really great till now. Really good write up !!!

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