कुछ बातें काम की/ how to stopOverthinking

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खुद के उल्टे सीधे ख्यालों को रस्सी से जकड़ कर कहीं बांधने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन हो नहीं पा रहा है। इनमें इतनी ताकत है कि घसीटते घसीटते मुझे काफी दूर तक ले आए हैं। जहां इतना अंधेरा है कि कुछ समझ नहीं आ रहा है.. किधर से आए हैं और किधर जाना है! दिमाग मदमस्त घोड़े की तरह दौड़ लगाता रहता है जिसकी लगाम कसकर पकड़ना बहुत जरूरी है। ख्यालों ही ख्यालों में आप कब चिंता के दलदल में डूबने लगते हैं आपको पता नहीं चलता। जैसे इनसेप्शन फिल्में अभिनेता अपने साथ एक वस्तु रखता है जो उसकी वास्तविकता का आभास कराती है। वैसे ही हमें भी थोड़ी थोड़ी देर पर अपनी वास्तविकता चेक करते रहनी चाहिए।

हम अपने ख्यालों में जब ज्यादा अंदर तक घुसने लगते हैं तब नकारात्मकता हमारे ऊपर हावी हो जाती है। इस दौर में हम अपनी वास्तविकता को भूलकर सिर्फ उस हवाई महल में फस कर रह जाते हैं। कई बार स्थिति इतनी खराब नहीं होती, जितनी हम सोच सोच कर उसे खराब कर देते हैं। समय अपनी गति से ही चलता है, परिणाम भी उसी गति के अनुसार मिलते हैं। लेकिन हमारी सोच उस गति से लाखों गुना तेज दौड़ लगाने लगती है। हम सालों पुरानी और सालों बाद आने वाली बातों में उलझ कर रह जाते हैं।

नापतोल और सही गलत की जांच परख करना बुरा नहीं है, लेकिन किसी चिंगारी को सोच सोच कर आग में तब्दील कर देना बेवकूफी ही कहा जायेगा। हम हर दिन इसी बेवकूफी का शिकार होते हैं, एक बार नहीं कई बार होते हैं। बहुत कुछ ऐसा हमारे आसपास घटित होता रहता है, जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। साथ ही उसका हमारे ऊपर सीधा कोई असर भी नहीं पड़ने वाला, लेकिन फिर भी हम उसके परिणाम दुष्परिणाम को लेकर बैठ जाते हैं।

ऐसे हालात से निपटने के लिए जरूरी है, शांत चित्त होकर सबसे पहले इस दिमागी घोड़े को नियंत्रित करना। अपनी सोच के हर एक पहलू को तोड़ तोड़ कर उसकी गहराई समझने की आवश्यकता है। कई बार हमारी सोच से बनाया हुआ पहाड़, एक छोटा सा टीला बन कर सामने आता है। सबसे दिलचस्प बात यह है, सच्चाई भी इसी के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। लिखना इस दौर से निकलने के लिए सबसे आसान उपाय है। आप अपनी सोच और चिंताओं को कागज पर उतारकर उन्हें छोटा और सरल कर देते हैं। इसके साथ ही अगर कुछ देर के लिए अपनी जगह और मनोदशा को बदल दिया जाए, तब हमें काफी सुकून मिलता है। इसीलिए अगर आपके पास खाली वक्त है तो सुबह और शाम टहलने जाना भी एक अच्छा उपाय हो सकता है। अलग-अलग लोगों से बात करना, अपनी किसी बड़ी समस्या को दोस्तों से साझा करना उस समस्या को छोटा कर देता है।

I am trying to tie my thoughts directly to the rope, but I am unable to do so. There is so much strength in them that dragging has brought me to a long distance.
Where it’s so dark that nothing can be understood. Where have you come from and where do you want to go? The mind keeps on running like a mad horse, which is very important to hold tight. You do not know when you start sinking in the swamp of anxiety. as in Inception film, the actor carries with him an object that gives an idea of his reality. In the same way, we should also keep checking our reality.

When we start going deeper inside our thoughts, then negativity dominates us. In this era, we forget our reality and just stay in that air palace. Many times the situation is not so bad, as much as we think and spoil it. Time moves at its own pace, Results are also found at the same pace. But our thinking starts running millions of times faster than that speed. We get entangled in the old things and the things that come after years.

It is not bad to check the right and wrong, But thinking continuously of a spark and turning it into a fire would be considered stupid. We fall prey to this stupidity every day, not once but many times. There is so much happening around us, over which we have no control. Also, it will not have any direct effect on us, but still we sit with its consequences.

To deal with such a situation, it is important to control this mindless horse first. There is a need to understand every aspect of your thinking by breaking it down. Many times the mountain formed by our thinking, comes out as a small mound. The most interesting thing is, the truth also revolves around this. Writing is the easiest way to get out of this phase. You put your thoughts and concerns on paper and make them short and simple. With this, if we change our place and mood for some time, then we get quite relaxed. That is why if you have free time, then going for a walk in the morning and evening, can also be a good solution. Talking to different people, sharing a big problem with friends makes that problem smaller.

adityamishravoice

2 thoughts on “कुछ बातें काम की/ how to stopOverthinking

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