जब तक है ON…1%

धीरे-धीरे फोन की बैट्री खत्म होने लगी थी, इसी के साथ-साथ सांसे भी बढ़ने लगी थी। आस पास कहीं भी लाइट का कोई सोर्स नज़र नहीं आ रहा था। सोचा था हम आधुनिक हो गये हैं, लेकिन शायद अभी भी बहुत कुछ अछूता है। खोजबीन के बीच इधर फोन की हालत काफी खराब होने लगी थी। चार्जिंग ही एक मात्र उपाय था, कोई आपातकालीन नंबर और सुबिधा इस परिस्थिति के लिए के लिए भी होना चाहिए। तुरंत डायल करके Emergency Charging दिला दी जाए।

माहौल इतना गंभीर हो रहा था कि स्कीन ON करते ही फोन आग बबूला हो जा रहा था। बैट्री वाला आईकॉन आंखें लाल करके चेतावनी दे रहा था। फिर न चाहते हुए वह समय आ ही गया, जब बैट्री 5% पर पहुंच गयी। ऐसा लगा कि अब off होना पक्का. हिम्मत करके लाइट की तलाश में बाहर निकल पड़े, बारिश के कारण अंधेरे की चादर चारों तरफ थी। पता चला कुछ दूर पर एक दुकान है, वहां सम्भव है कि चार्जिंग की व्यवस्था हो।

आज सच में Power Bank की बहुत याद आ रही थी, आप पैसे जमा करो या न करो पर ऊर्जा ज़रूर बचा कर रखो। दुकान की तलाश में पैर कब के निकल चुके थे, शरीर को भी पीछे पीछे आना ही था। बार-बार फोन को जगाकर उसका हाल भी ले रहे थे, बैट्री अब 3% पर आ गयी थी। समय से भी ज़्यादा तेज फोन की बैट्री भागती है, आज पता चला। फोन की बची-खुची ऊर्जा और विश्वास के साथ बढ़ते रहे।

दुकान भी मिल गयी और चार्जिंग प्वाइंट भी पर तभी फोन की घंटी बजी। फोन उठाया, आवाज आई- प्रिय ग्राहक, इस गाने को अपनी हैलो ट्यून बनाने के लिए * दबायें। जैसे झुंझलाकर फोन कट करना चाहा, उसके पहले ही उसने आखिरी सांस ले ली थी। एक सन्नाटा पसर गया, ऐसा लगा जैसे धरती का घूमना बंद हो गया हो, ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी हो। आज एहसास हुआ कि पेट पूजा से पहले फोन की चार्जिंग जरूरी है।

Adityamishravoice

Adityamishravoice

31 thoughts on “जब तक है ON…1%

  1. कहते जब तक जीवन
    साँसे जब तक शरीर यहां
    दिल की धड़कन हैं तब तक
    तब तक ही हम जीवित रहे यहां।।

    मानव मशीन दोनो समान
    आज सत्य साबित आपने किया
    मानव को भी नित्य भूख लगती धरा
    माशिन भी लाइट खाए नित्य यहां।।

    Liked by 3 people

    1. If it is because of language then sorry next time will add english as well.

      If it is because of context then

      : basic idea behind writing this Is these days we are taking care of our digital device more than ourselves. Digital media and mobile is taking control on us…. So i wrote it as a satire where story is based on specific situation (i.e battery low).

      Liked by 2 people

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