Full of Distraction

चाय के गर्म प्याले के साथ न्यूज की चुस्की लेते हुए सुबह की शुरुआत होती है. फिर ब्रेकिंग न्यूज़ की तलाश में एक-दो घंटे बीत जाते हैं. धीरे-धीरे न्यूज़ अपने रंग में आने लगती है, फिर शुरू होता है मनोरंजन का दौर. यहाँ से खबरें काफी पीछे छूट जाती हैं और मसाला आगे आ जाता है.

कुछ वक्त बीतने के बाद TV से हटाकर ध्यान मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचता है. रात भर की चिट्ठी पत्री और संदेश देखने- जवाब देने में भी कम वक्त थोड़ी लगता है.

अच्छा, मोबाइल में भी चार पांच अलग-अलग तरीके के प्लेटफार्म हैं. व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और यूट्यूब. इन सब की दीवारों पर तरह-तरह का ज्ञान बहता रहता है. उस पर अपनी प्रतिक्रिया देना भी जरूरी हो जाता है. साथ ही अपना ज्ञान परोशना भी आवश्यक होता है. इससे आपकी ज्ञान शक्ति और क्षमता का Virtual प्रदर्शन होता रहता है.

सुबह का पहला पहर इस कार्यक्रम की भेंट चला जाता है. फिर स्नान ध्यान और पेट पूजा करके एक बार फिर Notifications देखने की कोशिश घसीट कर सोशल मीडिया के प्रांगण में पटक देती है, जबकि हम ऐसा चाहते नहीं है.

खैर, अब जबरदस्ती के आगे क्या कर सकते हैं. इसी बीच किसी नए YouTube वीडियो का भी संदेश आ जाता है. इसको इग्नोर करना दौड़ में पीछे होने जैसा है. इसीलिए वीडियो में निहित ज्ञान का पान करना आवश्यक है. जैसे बाहर की तरफ आ ही रहे होते हैं, तभी Recommendation में कुछ नया देखकर ठहर जाते हैं. यह ठहराव दलदल जैसा है. आप इसमें अपने समय के साथ धंसते चले जाते हैं.

आपका दिमाग भी एक समय के बाद परिवर्तन मांगता है. सुबह से गेम एक भी नहीं खेला, ऐसे में थोड़ा रिलैक्स होना बनता है. मोबाइल में इस तरह की applications सुपरमार्केट की तरह उपलब्ध होती हैं. दो-चार Game सामान्य सी बात है.

इस रिलैक्सिंग सेशन के बाद गाड़ी आगे बढ़ने को तैयार ही होती है. तभी किसी नई सीरीज/मूवी का पता विश्वस्त सूत्रों से चलता है. दिमाग जाने की इजाजत नहीं देता लेकिन मन चंचल होता है. ऐसे में कुछ जतन निकाल कर पहुंच ही जाता है.

Web Series एक ऐसा मकड़जाल है, जिसमें 8-10 Episode जुड़े होते हैं. प्रत्येक भाग लगभग एक से आधे घंटे का होता है. इस तरह दिन का आधा भाग इधर कुर्बान हो ही जाता है.

इन सबके बीच नींद भी आती है, भूख लगती है. बैटरी चार्ज डिस्चार्ज होती रहती है. यह सिलसिला फिर शाम को रात तक घसीट लाता है. इतनी थकान और माथापच्ची के बाद असली काम अक्सर भूल जाते हैं.

किताबें इस मोबाइल के दबाव में गायब सी हो जाती हैं.
ज़िल्द पर लगी मिट्टी की मोटी परत, दिमाग पर भारी पड़ती है.
कलम पड़े-पड़े जाम हो जाती है और कागज नीलाम हो जाते हैं.

फिर इस उठापटक के बीच मोबाइल उठा कर हम टाइप करते हैं-

How to concentrate while studying!

Adityamishravoice

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