खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

भारत विविधताओं का देश है बचपन से पढ़ा था, देखने का अवसर भी मिल गया. उम्मीदों की गाड़ी झारखंड से स्टार्ट की, चलते चलते मोड़ कई आये पर ब्रेक नहीं लगा. पर अचानक एक चौराहे पर कुछ सुरक्षा और कानून व्यवस्था के जवानों ने दस्तक दी, कारण मेरी मुस्कुराहट नहीं थी. चेहरे पर न मास्क था और न अन्य गाड़ियों से सोशल डिस्टेंसिंग.. बस कट गया चालाकी वाला चालान. जो पैसे जोड़े थे मास्क ने तोड़ लिए.

खैर किस्मत को दोष देते हुए आगे बढ़े, सोचा वक्त बदलेगा. पर इतनी जल्दी बदलेगा पता नहीं था. बंगाल में पहुँच गए वहाँ आते ही क्या देखता हूँ..

चारों तरफ बड़ी बड़ी सैनिटाइजेशन की मशीन लगी है. ऊपर से आने वाली हवा और नीचे उड़ने वाली धूल भी वायरस मुक्त थी. न मास्क का भय, न कोरोना का खतरा. असली नया भारत और शसक्त भारत यही था.

Bengal


होली में जहाँ अभी दूर से शुभकामनाएँ दे रहे थे. यहाँ बंगाल में एक दूसरे को रसोगुल्ला में डुबो दे रहे थे. इतनी ज्यादा मजबूत इम्यूनिटी, रिसर्च का मुद्दा था. चारों तरफ मंगल गीत गाये जा रहे थे… खेला होबे.. खेला होबे.. होबे खेला.

तभी सामने एक बड़ा पार्क दिखाई दिया, जहाँ लाखों की संख्या में जनता दोनों हाथ उठाकर कुछ बोल रही थी. पास जाकर देखा तो असली मर्म समझ आया. मंच पर कुछ राजनेता थे, सामने लाखों की जनता. सबको यहीं से स्ट्रांग इम्यूनिटी मिली रही थी. हाथों में हाथ जोड़कर सब ऊर्जा का आदानप्रदान कर रहे थे.

एक कोने में कोरोना डरा सहमा मरियल हालत में पड़ा था, मैनें थोड़ा गंदा पानी पिलाया तो उसमें हिम्मत आई. गिड़गड़ाते हुए बोला भैया 100-200 ले लो पर दिल्ली, मुंबई छोड़ आओ. मैंने कहा क्या हुआ, बोला अपुन मर जायेगा इधर, नहीं बचेगा.

सच में माहौल इतना पाजिटिव था कि आप एक दूसरे की सांसें भी बिना डर के महसूस कर सको. सच में चुनाव में बड़ी ताकत होती है. लोकतंत्र यही है और यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है. आज फिर जनता की एकता के सामने कोरोना भीगी बिल्ली बन गया. ये बात और राज्यों को कब समझ आयेगी पता नहीं.. पर अभी तो स्वर्ग बंगाल में ही है.

Adityamishravoice

adityamishravoice

12 thoughts on “खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

  1. I would love to feature one of your post on my blog. You choose. I would translate to English using AI. Is this excerpt a good translation. Kevy Michaels

    India is a country of diversities, had studied since childhood, got an opportunity to see. The train of expectation started from Jharkhand, due to the diversion, many did not brake. But suddenly some security and law and order personnel knocked at an intersection, the reason was not my smile. There was no mask on the face nor social distancing from other vehicles .. Just a clever challan was cut. The masks which were added broke the money.

    Well go ahead blaming luck, thought time will change. But did not know that would change so soon. What I see as soon as I reach there in Bengal ..

    A large sanitization machine is installed all around. The air coming from above and the dust blowing below were also virus free. Neither the fear of masks, nor the danger of corona. This was the real new India and the empowered India.

    Liked by 1 person

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