दो बूंद पेट्रोल की

जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज है, इस रफ्तार को और गति देने के लिए हम एक तरीके के विशेष वाहन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आजकल न जाने क्यों वाहन का चलते-चलते गला ही सूख जा रहा था। इसी समस्या से निपटने के लिए जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला नई बीमारी हो गई […]

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कोहरे को भी कोसना कैसा

एक धूप सी सर्द चादरअंधेरे का एक रूपसूरज को खुलेआम चुनौती औरठंड का एक प्रतीक. आंखों को कुछ ना दिखने का भ्रमनज़र हो पर कुछ नज़र ना आएकाली नहीं सफेद चादर है कोहराएक ठंडे जज्बातों की भीड़.एक भाव, कंपकपाते विचारों कादिन के उजाले में भी दीपक जलवाता हैकोहरा ऐसे ही कोहराम मचाता है. इस सफ़ेद […]

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किसान हो, मजाक मत करो

“अच्छा, और वह गाड़ी किसकी है? यह कपड़े, चप्पल यह सब तुम्हारा ही है! किसान तो नहीं लगते तुम. रुको, अभी किसान दिखाता हूं.” साहब ने किसी को आवाज दी, उधर से धीरे-धीरे एक हाड मांस का शरीर आता दिखाई दिया. तन पर कपड़ों से ज्यादा चमड़ी लटक रही थी. पतला दुबला पैर और कमर […]

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खुशी एक, रास्ते अनेक

खुशियों का अगर एक बाजार होता, तो धंधा उम्मीदों के पार होता.न कोई मोल भाव, न उधारी का झंझट.खुशी सब की आवश्यकताओं में सबसे ऊपर है. हां उसको पानी के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं. किसी की खुशी दूसरे का गम भी हो सकता है. वहीं कोई परेशान आदमी खुशी के माहौल में अच्छा महसूस […]

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पहला हादसा, पहला स्नान

है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में.मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है. यह कविता गर्मी में खून को और गर्म करने के लिए अच्छी है. पर जब ठंडी शुरू होती है तो, यही पत्थर का पानी कहर बनकर टूटता है. वास्तव में ठंडी का असली विलेन […]

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Full of Distraction

चाय के गर्म प्याले के साथ न्यूज की चुस्की लेते हुए सुबह की शुरुआत होती है. फिर ब्रेकिंग न्यूज़ की तलाश में एक-दो घंटे बीत जाते हैं. धीरे-धीरे न्यूज़ अपने रंग में आने लगती है, फिर शुरू होता है मनोरंजन का दौर. यहाँ से खबरें काफी पीछे छूट जाती हैं और मसाला आगे आ जाता […]

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On Line से Online की ओर

खाने से लेकर खजाने तक की जरूरत हो आज इंटरनेट पूरी कर रहा है. आप घर बैठकर बिना कुछ किए, बहुत कुछ करने के भ्रम में रहते हैं. हम जब से डिजिटल हुए हैं, तभी से हमारा संसार छोटा हो गया है. पहले सब कुछ देखने के लिए कांच के ऐनक का इस्तेमाल होता था, […]

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हाथरस के पीछे कितने हाथ?

सवाल ये नहीं कि कौन निंदा कर रहा है या कौन राजनीति पर उतारू है? मुद्दा यह है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?प्रशासन का रवैया और सरकारों का मत घटना होने के बाद एक सा हो जाता है। एक कड़ी कार्रवाई की सांत्वना देने लगता है, जबकि दूसरा निलबंल का टोकरा उठाने। निर्भया के […]

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ओपिनियन…. चलो उड़ेला जाए

सुबह से हो गई शाम, न लगा कोई भी इल्ज़ामबताओ कैसे होगा काम.. बताओ कैसे होगा काम कि जाओ खबर ले आओ,कि जाओ और चिल्लाओ.अपने सर को पटको,या फिर दौड़ लगाओ.लगे तो नाचो-गाओ, या चाहे कुछ खाओबस…. बढ़ाओ थोड़ी TRPहां जी हां थोड़ी TRP. कोई नहीं देखेगा गांव,न किसान, न ठंडी छांव.उनको ड्रग्स दिखाओ,उनको whatsapp […]

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