माँ #mother’s day

दिखने वालों को #maa में भगवान भी दिखता है.पर अपना प्यार इतना है किअगर बिना बात के जताने लगते हैं तो माँ कहती है क्या हुआ परेशान हो, कोई बात हो गई? हर समस्या का समाधान है माँ.बंजर जिंदगी में लहलहाती खुशी का अरमान है माँमाँ सहारा है, माँ किनारा हैमाँ उम्मीद है कि सब […]

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कोहरे को भी कोसना कैसा

एक धूप सी सर्द चादरअंधेरे का एक रूपसूरज को खुलेआम चुनौती औरठंड का एक प्रतीक. आंखों को कुछ ना दिखने का भ्रमनज़र हो पर कुछ नज़र ना आएकाली नहीं सफेद चादर है कोहराएक ठंडे जज्बातों की भीड़.एक भाव, कंपकपाते विचारों कादिन के उजाले में भी दीपक जलवाता हैकोहरा ऐसे ही कोहराम मचाता है. इस सफ़ेद […]

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आखिर क्यों चलती है कलम

ऐसा एक बार नहीं अक्सर होता है, जब लगता है सब कुछ हाथ से छूटता जा रहा है। जब बिना हवा के भी आंधियां चलने लगती हैं और सब कुछ ताश के पत्तों जैसा बिखरता हुआ लगता है। तब मेरे शब्द हर बार मेरा सहारा बनते हैं। कलम चलती है और कमाल हो जाता है। […]

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जब कांटों पर चलना पड़ जाए

हर दिन सुबह खूबसूरत ही नहीं होती, कभी-कभी काले बादल सूर्य की किरणों को ढक देते हैं। हर एक रास्ता सीधा ही नहीं होता, कभी-कभी हमें कांटों पर भी चलना होता है। यहां कांटा देखकर घबराने की या रास्ता बदलने की बात नहीं हो रही है, यहां कांटों पर चलना है और पार जाना है। […]

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राजा-रानी: कविता-कहानी

Full poetry link given below: यह एक प्रयास है कलम को आकार देने का, बदलते दौर की परिभाषा समझने का. हम एक राजा को सुनते थे, हम एक रानी को गुनते थे.वह अपनी एक कहानी थी, जिसमें एक राजा रानी थी. Link-: राजा-रानी वाली कहानी Adityamishravoice Twitter- @voiceaditya

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