ऑक्सीजन: अंतिम आस तक

ऑक्सीजन की तलाश और आस लगातार जारी है. जिनके पास कुछ नहीं है, वह अपना सब कुछ जुटाकर सांसे खरीद रहे हैं. जिनके पास सब कुछ है, वह कितना कुछ भुलाकर वोट जुटा रहे हैं. जीवन इतना कठिन, सांस इतनी महंगी हो जाएगी. किसने सोचा था? हवाओं के बीच हंसते गाते लोग, सिलेंडर लादे लाइन […]

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मीडिया बीमार.. लो आ गया मुख्तार

मुख्तार अंसारी…. बाहुबली का नया ठिकाना यूपी इस लाइन में जितना जोर बाहुबली पर दिया जा रहा है। यह तथ्य कम, महिमामण्डन जाता लग रहा है। गाड़ी पलट न जाए, लगातार इस आशंका के बीच वह गाड़ी आगे बढ़ रही थी। वैसे मीडिया से बचाने के चक्कर में भी अनियंत्रित हो सकती है। भारतीय मीडिया […]

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खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

भारत विविधताओं का देश है बचपन से पढ़ा था, देखने का अवसर भी मिल गया. उम्मीदों की गाड़ी झारखंड से स्टार्ट की, चलते चलते मोड़ कई आये पर ब्रेक नहीं लगा. पर अचानक एक चौराहे पर कुछ सुरक्षा और कानून व्यवस्था के जवानों ने दस्तक दी, कारण मेरी मुस्कुराहट नहीं थी. चेहरे पर न मास्क […]

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चुनाव के दिन, तेरे बिन

यह आखिरी दिन था चुनाव प्रचार का और हमारी मोहब्बत का भी। पिछले 6 महीने से हम एक दूसरे को बहुत पसंद कर रहे हैं। बिन कहे तारीफ हो रही है और बिन मांगे मुराद मिल रही है। थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन यह मोहब्बत समाज के लिए मिसाल जैसी है। सोचो अगर […]

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किसान हो, मजाक मत करो

“अच्छा, और वह गाड़ी किसकी है? यह कपड़े, चप्पल यह सब तुम्हारा ही है! किसान तो नहीं लगते तुम. रुको, अभी किसान दिखाता हूं.” साहब ने किसी को आवाज दी, उधर से धीरे-धीरे एक हाड मांस का शरीर आता दिखाई दिया. तन पर कपड़ों से ज्यादा चमड़ी लटक रही थी. पतला दुबला पैर और कमर […]

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ओपिनियन…. चलो उड़ेला जाए

सुबह से हो गई शाम, न लगा कोई भी इल्ज़ामबताओ कैसे होगा काम.. बताओ कैसे होगा काम कि जाओ खबर ले आओ,कि जाओ और चिल्लाओ.अपने सर को पटको,या फिर दौड़ लगाओ.लगे तो नाचो-गाओ, या चाहे कुछ खाओबस…. बढ़ाओ थोड़ी TRPहां जी हां थोड़ी TRP. कोई नहीं देखेगा गांव,न किसान, न ठंडी छांव.उनको ड्रग्स दिखाओ,उनको whatsapp […]

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Tv debate recipe

पाकिस्तान, हिंदू मुस्लिम, विपक्ष जैसे मुद्दों को सबसे पहले बाजार से चुना जाता है. फिर उसमें थोड़ा कॉन्ट्रोवर्सी की बौछार की जाती है. एक पॉपुलर एंकर के हाथों इसे सजाया जाता है, कुछ अच्छे कंटेंट राइटर से भड़काऊ पंक्तियां और पंच लाइन लिखवाई जाती हैं. इन सब को एडिटिंग के तड़के के साथ थोड़ी देर […]

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मन की भड़ास

मनवा तो पंछी भया, उड़ि के चला आकाश… कबीर दास ने मन को पंछी बनकर उड़ा दो दिया, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि यह एक हवा का गुब्बारा बन फूट भी सकता है. मन के भीतर कई बार विचारों की अधिकता हो जाती है. उस समय आकाश में उड़ रहा मन का पंछी अपने […]

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चुनाव और कोरोना

जिस कोरोना वायरस के 500 से नीचे आंकड़े निकलने पर सब कुछ बंद करने की रणनीति बनने लगी थी। आज की तारीख में हर दिन लगभग 10000 मामले सामने आ रहे हैं, पर अब चेहरे पर शिकन नहीं है। सही बात है ज्यादा चिंता करना सिर के बाल और सर जी का हाल दोनों खराब […]

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