ट्वीट-ट्वीट, मैं-मैं

हुआ सवेरा ट्विटर खोली, सब यूजर्स ने राम राम बोली. दिन की शुरुआत ट्विटर पर कुछ ऐसे ही होती है। ज्ञान का अथाह सागर है, जिसमें कुछ लोग ज्ञान लेते रहते हैं और कुछ ज्ञानी ज्ञान देते रहते हैं। यह कारवां ऐसे ही चलता रहता, अगर ब्लू टिक नाम का बवंडर ना आया होता। अचानक […]

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ऑक्सीजन: अंतिम आस तक

ऑक्सीजन की तलाश और आस लगातार जारी है. जिनके पास कुछ नहीं है, वह अपना सब कुछ जुटाकर सांसे खरीद रहे हैं. जिनके पास सब कुछ है, वह कितना कुछ भुलाकर वोट जुटा रहे हैं. जीवन इतना कठिन, सांस इतनी महंगी हो जाएगी. किसने सोचा था? हवाओं के बीच हंसते गाते लोग, सिलेंडर लादे लाइन […]

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मीडिया बीमार.. लो आ गया मुख्तार

मुख्तार अंसारी…. बाहुबली का नया ठिकाना यूपी इस लाइन में जितना जोर बाहुबली पर दिया जा रहा है। यह तथ्य कम, महिमामण्डन जाता लग रहा है। गाड़ी पलट न जाए, लगातार इस आशंका के बीच वह गाड़ी आगे बढ़ रही थी। वैसे मीडिया से बचाने के चक्कर में भी अनियंत्रित हो सकती है। भारतीय मीडिया […]

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खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

भारत विविधताओं का देश है बचपन से पढ़ा था, देखने का अवसर भी मिल गया. उम्मीदों की गाड़ी झारखंड से स्टार्ट की, चलते चलते मोड़ कई आये पर ब्रेक नहीं लगा. पर अचानक एक चौराहे पर कुछ सुरक्षा और कानून व्यवस्था के जवानों ने दस्तक दी, कारण मेरी मुस्कुराहट नहीं थी. चेहरे पर न मास्क […]

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दो बूंद पेट्रोल की

जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज है, इस रफ्तार को और गति देने के लिए हम एक तरीके के विशेष वाहन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आजकल न जाने क्यों वाहन का चलते-चलते गला ही सूख जा रहा था। इसी समस्या से निपटने के लिए जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला नई बीमारी हो गई […]

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किसान हो, मजाक मत करो

“अच्छा, और वह गाड़ी किसकी है? यह कपड़े, चप्पल यह सब तुम्हारा ही है! किसान तो नहीं लगते तुम. रुको, अभी किसान दिखाता हूं.” साहब ने किसी को आवाज दी, उधर से धीरे-धीरे एक हाड मांस का शरीर आता दिखाई दिया. तन पर कपड़ों से ज्यादा चमड़ी लटक रही थी. पतला दुबला पैर और कमर […]

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पहला हादसा, पहला स्नान

है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में.मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है. यह कविता गर्मी में खून को और गर्म करने के लिए अच्छी है. पर जब ठंडी शुरू होती है तो, यही पत्थर का पानी कहर बनकर टूटता है. वास्तव में ठंडी का असली विलेन […]

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हाथरस के पीछे कितने हाथ?

सवाल ये नहीं कि कौन निंदा कर रहा है या कौन राजनीति पर उतारू है? मुद्दा यह है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?प्रशासन का रवैया और सरकारों का मत घटना होने के बाद एक सा हो जाता है। एक कड़ी कार्रवाई की सांत्वना देने लगता है, जबकि दूसरा निलबंल का टोकरा उठाने। निर्भया के […]

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