ट्वीट-ट्वीट, मैं-मैं

हुआ सवेरा ट्विटर खोली, सब यूजर्स ने राम राम बोली. दिन की शुरुआत ट्विटर पर कुछ ऐसे ही होती है। ज्ञान का अथाह सागर है, जिसमें कुछ लोग ज्ञान लेते रहते हैं और कुछ ज्ञानी ज्ञान देते रहते हैं। यह कारवां ऐसे ही चलता रहता, अगर ब्लू टिक नाम का बवंडर ना आया होता। अचानक […]

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आंखें हैं, तो गड़ाना पड़ेगा

आंख गड़ाने के लिए गिने चुने ऐप्स हैं, संख्या कम लग रही. भला हो इंस्टाग्राम रील्स का. कि समय, समय से कट जाता है. वरना सोचो आफत की बात है, 10 बजे सोकर उठे, फिर क्या किया जाए!ब्रश मंजन जल्दी हो जाता है, वाशरूम में भी एक गेम का समय लगता है. अब आगे क्या […]

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माँ #mother’s day

दिखने वालों को #maa में भगवान भी दिखता है.पर अपना प्यार इतना है किअगर बिना बात के जताने लगते हैं तो माँ कहती है क्या हुआ परेशान हो, कोई बात हो गई? हर समस्या का समाधान है माँ.बंजर जिंदगी में लहलहाती खुशी का अरमान है माँमाँ सहारा है, माँ किनारा हैमाँ उम्मीद है कि सब […]

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ऑक्सीजन: अंतिम आस तक

ऑक्सीजन की तलाश और आस लगातार जारी है. जिनके पास कुछ नहीं है, वह अपना सब कुछ जुटाकर सांसे खरीद रहे हैं. जिनके पास सब कुछ है, वह कितना कुछ भुलाकर वोट जुटा रहे हैं. जीवन इतना कठिन, सांस इतनी महंगी हो जाएगी. किसने सोचा था? हवाओं के बीच हंसते गाते लोग, सिलेंडर लादे लाइन […]

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मीडिया बीमार.. लो आ गया मुख्तार

मुख्तार अंसारी…. बाहुबली का नया ठिकाना यूपी इस लाइन में जितना जोर बाहुबली पर दिया जा रहा है। यह तथ्य कम, महिमामण्डन जाता लग रहा है। गाड़ी पलट न जाए, लगातार इस आशंका के बीच वह गाड़ी आगे बढ़ रही थी। वैसे मीडिया से बचाने के चक्कर में भी अनियंत्रित हो सकती है। भारतीय मीडिया […]

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खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

भारत विविधताओं का देश है बचपन से पढ़ा था, देखने का अवसर भी मिल गया. उम्मीदों की गाड़ी झारखंड से स्टार्ट की, चलते चलते मोड़ कई आये पर ब्रेक नहीं लगा. पर अचानक एक चौराहे पर कुछ सुरक्षा और कानून व्यवस्था के जवानों ने दस्तक दी, कारण मेरी मुस्कुराहट नहीं थी. चेहरे पर न मास्क […]

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कोहरे को भी कोसना कैसा

एक धूप सी सर्द चादरअंधेरे का एक रूपसूरज को खुलेआम चुनौती औरठंड का एक प्रतीक. आंखों को कुछ ना दिखने का भ्रमनज़र हो पर कुछ नज़र ना आएकाली नहीं सफेद चादर है कोहराएक ठंडे जज्बातों की भीड़.एक भाव, कंपकपाते विचारों कादिन के उजाले में भी दीपक जलवाता हैकोहरा ऐसे ही कोहराम मचाता है. इस सफ़ेद […]

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किसान हो, मजाक मत करो

“अच्छा, और वह गाड़ी किसकी है? यह कपड़े, चप्पल यह सब तुम्हारा ही है! किसान तो नहीं लगते तुम. रुको, अभी किसान दिखाता हूं.” साहब ने किसी को आवाज दी, उधर से धीरे-धीरे एक हाड मांस का शरीर आता दिखाई दिया. तन पर कपड़ों से ज्यादा चमड़ी लटक रही थी. पतला दुबला पैर और कमर […]

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खुशी एक, रास्ते अनेक

खुशियों का अगर एक बाजार होता, तो धंधा उम्मीदों के पार होता.न कोई मोल भाव, न उधारी का झंझट.खुशी सब की आवश्यकताओं में सबसे ऊपर है. हां उसको पानी के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं. किसी की खुशी दूसरे का गम भी हो सकता है. वहीं कोई परेशान आदमी खुशी के माहौल में अच्छा महसूस […]

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