ट्वीट-ट्वीट, मैं-मैं

हुआ सवेरा ट्विटर खोली, सब यूजर्स ने राम राम बोली. दिन की शुरुआत ट्विटर पर कुछ ऐसे ही होती है। ज्ञान का अथाह सागर है, जिसमें कुछ लोग ज्ञान लेते रहते हैं और कुछ ज्ञानी ज्ञान देते रहते हैं। यह कारवां ऐसे ही चलता रहता, अगर ब्लू टिक नाम का बवंडर ना आया होता। अचानक […]

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खेला होबे या कोरोना… डर काहे का

भारत विविधताओं का देश है बचपन से पढ़ा था, देखने का अवसर भी मिल गया. उम्मीदों की गाड़ी झारखंड से स्टार्ट की, चलते चलते मोड़ कई आये पर ब्रेक नहीं लगा. पर अचानक एक चौराहे पर कुछ सुरक्षा और कानून व्यवस्था के जवानों ने दस्तक दी, कारण मेरी मुस्कुराहट नहीं थी. चेहरे पर न मास्क […]

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खुशी एक, रास्ते अनेक

खुशियों का अगर एक बाजार होता, तो धंधा उम्मीदों के पार होता.न कोई मोल भाव, न उधारी का झंझट.खुशी सब की आवश्यकताओं में सबसे ऊपर है. हां उसको पानी के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं. किसी की खुशी दूसरे का गम भी हो सकता है. वहीं कोई परेशान आदमी खुशी के माहौल में अच्छा महसूस […]

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पहला हादसा, पहला स्नान

है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में.मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है. यह कविता गर्मी में खून को और गर्म करने के लिए अच्छी है. पर जब ठंडी शुरू होती है तो, यही पत्थर का पानी कहर बनकर टूटता है. वास्तव में ठंडी का असली विलेन […]

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Full of Distraction

चाय के गर्म प्याले के साथ न्यूज की चुस्की लेते हुए सुबह की शुरुआत होती है. फिर ब्रेकिंग न्यूज़ की तलाश में एक-दो घंटे बीत जाते हैं. धीरे-धीरे न्यूज़ अपने रंग में आने लगती है, फिर शुरू होता है मनोरंजन का दौर. यहाँ से खबरें काफी पीछे छूट जाती हैं और मसाला आगे आ जाता […]

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On Line से Online की ओर

खाने से लेकर खजाने तक की जरूरत हो आज इंटरनेट पूरी कर रहा है. आप घर बैठकर बिना कुछ किए, बहुत कुछ करने के भ्रम में रहते हैं. हम जब से डिजिटल हुए हैं, तभी से हमारा संसार छोटा हो गया है. पहले सब कुछ देखने के लिए कांच के ऐनक का इस्तेमाल होता था, […]

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हाथरस के पीछे कितने हाथ?

सवाल ये नहीं कि कौन निंदा कर रहा है या कौन राजनीति पर उतारू है? मुद्दा यह है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?प्रशासन का रवैया और सरकारों का मत घटना होने के बाद एक सा हो जाता है। एक कड़ी कार्रवाई की सांत्वना देने लगता है, जबकि दूसरा निलबंल का टोकरा उठाने। निर्भया के […]

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आखिर क्यों चलती है कलम

ऐसा एक बार नहीं अक्सर होता है, जब लगता है सब कुछ हाथ से छूटता जा रहा है। जब बिना हवा के भी आंधियां चलने लगती हैं और सब कुछ ताश के पत्तों जैसा बिखरता हुआ लगता है। तब मेरे शब्द हर बार मेरा सहारा बनते हैं। कलम चलती है और कमाल हो जाता है। […]

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जब कांटों पर चलना पड़ जाए

हर दिन सुबह खूबसूरत ही नहीं होती, कभी-कभी काले बादल सूर्य की किरणों को ढक देते हैं। हर एक रास्ता सीधा ही नहीं होता, कभी-कभी हमें कांटों पर भी चलना होता है। यहां कांटा देखकर घबराने की या रास्ता बदलने की बात नहीं हो रही है, यहां कांटों पर चलना है और पार जाना है। […]

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जब तक है ON…1%

धीरे-धीरे फोन की बैट्री खत्म होने लगी थी, इसी के साथ-साथ सांसे भी बढ़ने लगी थी। आस पास कहीं भी लाइट का कोई सोर्स नज़र नहीं आ रहा था। सोचा था हम आधुनिक हो गये हैं, लेकिन शायद अभी भी बहुत कुछ अछूता है। खोजबीन के बीच इधर फोन की हालत काफी खराब होने लगी […]

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