कोहरे को भी कोसना कैसा

एक धूप सी सर्द चादरअंधेरे का एक रूपसूरज को खुलेआम चुनौती औरठंड का एक प्रतीक. आंखों को कुछ ना दिखने का भ्रमनज़र हो पर कुछ नज़र ना आएकाली नहीं सफेद चादर है कोहराएक ठंडे जज्बातों की भीड़.एक भाव, कंपकपाते विचारों कादिन के उजाले में भी दीपक जलवाता हैकोहरा ऐसे ही कोहराम मचाता है. इस सफ़ेद […]

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